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Builders did fraud with many families in Lucknow

लखनऊ में बिल्डरों की धोखाधड़ी: लाखों रुपये चुकाकर भी कई वर्षों से आशियाने के लिए भटक रहे 20 हजार परिवार

30 लाख जमा कर दिए, पांच साल से काट रहे चक्कर

केस-1 रोहतास प्रेसीडेंशियल में राजीव शर्मा ने एक फ्लैट अपने बेटे के लिए बुक कराया। उन्होंने बैंक कर्ज लेकर व अपनी जमा-पूंजी से करीब 30 लाख चुका दिए। 2014 में उनको फ्लैट मिल जाना चाहिए था। पांच साल बाद भी प्रोजेक्ट अधूरा पड़ा है।

प्लॉट मिला नहीं, सात लाख रुपये छह साल से फंसा है

केेस-2 आरसंस में प्रखर सिटी-2 में रंजना सिंह ने अपने लिए मकान बनाने के लिए भूखंड लिया। 2012 में बुकिंग हुई। 2013 में भूखंड मिलना था। गाढ़ी कमाई का करीब सात लाख रुपये उनका फंसा हुआ है।

रोहतास और आरसंस की तरह लखनऊ में छह से ज्यादा बिल्डर हैं जिन्होंने हजारों की संख्या में लोगों के साथ ठगी की। आशियाना पाने के लिए जमा पूंजी और बैंक से कर्ज लेकर पैसा जमा करने के बावजूद 20 हजार से अधिक परिवार बरसों से भटक रहे हैं। इनमें से कई बिल्डर तो अब पूरी तरह लखनऊ के रियल एस्टेट सेक्टर से गायब हो चले हैं।

इनके कार्यालय तक बंद हो चुके हैं। रेरा में इस समय अंसल के अलावा रोहतास, आरसंस, शाइन सिटी बिल्डर कंपनियों के वादों पर सख्ती हुई है। सबसे अधिक शिकायतें इन बिल्डरों के खिलाफ भी हैं। कुछ ऐसे बिल्डरों की भी शिकायतें रेरा को मिली हैं जिनके प्रोजेक्ट ही पंजीकृत रेरा में नहीं कराए गए।

देखें- कहां क्या हाल?

इनमें प्रमुख रूप से सहारा सिटी होम्स, रतन हाउसिंग, एमार एमजीएफ, श्रीइंफ्रा, शाइन सिटी, प्रोपलरिटी समूह शामिल हैं। इनमें से अधिकांश के खिलाफ पुलिस में भी एफआईआर दर्ज कराई गईं। रेरा सचिव अबरार अहमद का कहना है कि हमारी पहली प्राथमिकता आवंटियों के हित को पूरा करना है। बिल्डर कंपनी पर कार्रवाई शुरू कर दी जाती है तो प्रोजेक्ट के पूरा नहीं होने की आशंका पैदा हो जाती है। ऐसे में रेरा की टीम कोशिश करती है कि प्रोजेक्ट को पूरा कराने के लिए बिल्डर पर दबाव बनाया जाए।

ये तो संगठित लूट जैसा….कार्रवाई के साथ आवंटियों को भी राहत मिले

आवंटियों का कहना है कि बिल्डरों पर कार्रवाई होनी चाहिए। इससे संगठित लूट को आगे होने से रोका जा सकेगा। इसके साथ ही लेकिन जिन परिवारों के साथ लूट हुई है। उनको भी राहत भूखंड, फ्लैट या रिफंड दिलाकर दिलानी चाहिए। अभी तक रेरा भले ही कुछ मामलों में रिफंड दिलाने में सफल रहा हो, पर पुलिस ने कुछ ठोस कार्रवाई नहीं की हैं।रोहतास के मामले में असली दोषियों पर पुलिस कार्रवाई नहीं कर सकी है। अंसल के मामले में तो अभी तक कार्रवाई ही शुरू नहीं हो पाई है।

कहां क्या हाल?

बिल्डर प्रभावित आवंटी फंसे प्रोजेक्ट
अंसल 6500 1, हाईटेक टाउनशिप
रोहतास 1800 4, दो इंटीग्रेटेड टाउनशिप
शाइन सिटी 8000 6 से अधिक
आरसंस 2500 4 या अधिक प्रोजेक्ट
श्री इंफ्रा 800 3
प्रोपलरिटी 1500 5-6 प्रोजेक्ट प्रस्तावित रहे

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