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Congress beat BJP in Madhya Pradesh Chitrakoot by election

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रामनगरी में नहीं चला ‘शिव’राज का जादू, जहां-जहां किया प्रचार वहीं पिछड़ गई भाजपा

मध्यप्रदेश के चित्रकूट विधानसभा के लिए हुए उप-चुनाव में भाजपा की हार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान समेत पार्टी के लिए बड़े झटके की तरह है। भाजपा के लिए यह इसलिए भी झटका है कि कुछ दिन बाद ही गुजरात में विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में विरोधी इस हार को भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी के घटते प्रभाव से भी जोड़ सकते हैं।

पुरजोर कोशिश के बाद भी चित्रकूट में नहीं चला शिवराज का जादू, कांग्रेस ने जीती सीट

बता दें कि यहां कांग्रेस उम्‍मीदवार नीलांशु चतुर्वेदी ने भाजपा उम्‍मीदवार शंकर दयाल त्रिपाठी को 14,833 वोटों से हरा दिया। पूर्व में भी यह सीट कांग्रेस के ही पास रही है, जिस पर पार्टी के प्रेम सिंह लंबे समय से विधायक थे। लेकिन इसी साल 29 मई को प्रेम सिंह का निधन हो गया था। प्रेम सिंह यहां से तीन बार विधायक रहे हैं।

उनकी मौत के बाद सीट खाली हुई तो बीते 9 नवंबर को यहां उपचुनाव हुए थे। सीट खाली होने के बाद भाजपा को यहां अपने लिए अवसर दिखा तो यहां जीत दर्ज करने के लिए भाजपा और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पूरा दम झोंक दिया था।

गांव में रात गुजारना भी नहीं आया काम

प्रदेश भाजपा और शिवराज सिंह के लिए यह चुनाव कितना अहम था इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है की खुद सीएम शिवराज ने चित्रकूट विधानसभा के तुर्रा गांव में मुख्यमंत्री ने चुनाव प्रचार के दौरान आदिवासी लालमन गौड़ के घर पर अन्य गांव वालों के साथ भोजन किया था। इसके बाद रात्रि विश्राम भी गांव में ही किया।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव के मुताबिक सीएम शिवराज ने पार्टी आकाओं के आदेश पर गांव में डेरा डाला और तुर्रा आदिवासी के घर पर रुके, उन्होंने आरोप लगाया कि सीएम के लिए गांव में पूरी साजसज्जा कराई गई थी।

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि चुनाव के अगले दिन आदिवासी ग्रामीण के घर से सरकार के लोग चौखट तक उठा ले गए। यह आरोप भी लगाया कि शिवराज के लिए ग्रामीण के घर में अस्‍थायी बाथरूम बनाया जिसे बाद में अधिकारी साथ ले गए। खास बात ये रही कि जिस तुर्रा गांव में मुख्यमंत्री ने रात बिताई उसी गांव से भाजपा प्रत्याशी कांग्रेस उम्‍मीदवार से 210 मतों से पिछड़ गए। यहां पर बीजेपी को मात्र 203 और कांग्रेस को 413 वोट मिले हैं।

शिवराज ने झोंक दी थी पूरी ताकत फिर भी नहीं बचा पाए साख

बता दें कि मध्य प्रदेश के चित्रकूट विधानसभा की मतगणना में सीएम शिवराज सिंह ने भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में जिन इलाकों में चुनावी सभाएं की थीं, उनमें अधिकांश जगह पर कांग्रेस के उम्मीदवार को बढ़त मिली है।

धर्मनगरी में फीका पड़ा भगवा रंग, यहां उपचुनाव में भाजपा को मिली करारी शिकस्त

सीएम शिवराज ने चित्रकूट विधानसभा चुनाव के लिए हिरौधी, पिडरा, मझगवा, अर्जुनपुर, बरौधा, प्रतापगंज, में चुनावी सभाओं को संबोधित किया था। इन सभी जगहों पर भाजपा के प्रत्याशी शंकर दयाल त्रिपाठी पिछड़ गए हैं। कांग्रेस उम्मीदवार नीलांशु चतुर्वेदी ने इन सभी जगहों पर भारी बढ़त हासिल की है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान व उपमुख्यमंत्री की मेहनत गई बेकार

चित्रकूट विधानसभा के उप चुनाव में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तीन दिनों तक विद्यानसभा क्षेत्र में रहकर प्रचार किया। इस दौरान कई सभाए ंभी की। इसके बाद भी भाजपा के प्रत्याशी को करारी हार मिली। मप्र के एक दर्जन मंत्री भी क्षेत्र में लगातार डटे रहे। यहीं नहीं यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य भी चुनावी सभा करने आए थे लेकिन उसका भी कहीं प्रभाव नहीं दिखा। सतना मप्र भाजपा जिलाध्यक्ष नरेंद्र त्रिपाठी हार से निराश दिखे लेकिन कहा कि यह तो पूर्व विधायक प्रेमसिंह के निधन पर सहानुभूति के कारण कांग्रेस जीती है।

2018 के विधानसभा चुनाव का आगाज मान रही कांग्रेस

मालूम हो कि चित्रकूट को कांग्रेस की परंपरागतत सीट माना जाता है। कांग्रेस की जीत के बाद मध्य प्रदेश के अध्यक्ष अरुण यादव ने कहा कि, ये नतीजे शिवराज सरकार की नीतियों की हार है। उन्होंने कहा कि इसे 2018 विधानसभा चुनाव का आगाज माना जाना चाहिए।

भाजपा की बढ़ी चिंता

दरअसल, तीन बार से मुख्यमंत्री का पद संभाल रहे शिवराज सिंह चौहान राज्य में भाजपा का सबसे बड़ा चेहरा हैं। उनकी और उनके दर्जनों मंत्रियों की मेहनत के बाद भाजपा को मामूली अंतर से ही सही, जीत की उम्मीद तो थी।

लेकिन बड़े अंतर की हार ने उसे चौंकाया है। इस नतीजे को अगले दो विधानसभा उपचुनावों मुंगावली व कोलारस में भी जीत के लिहाज से चुनौती माना जा रहा है।

​चित्रकूट के चुनाव नतीजे ने भाजपा आलाकमान को भी चिंता में डाल दिया है। इसकी सबसे बड़ी वजह है मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का चित्रकूट में तीन दिन डेरा जमाकर धुआंधार प्रचार और तमाम घोषणाओं के बावजूद नतीजे मनमाफिक न आना।

यहां तक कि चौहान ने जिस आदिवासी के घर पर रात गुजारी, उस गांव में भाजपा का काफी अंतर से पीछे रह गई। यही नहीं जिन इलाकों में चौहान की सभाएं हुईं, वहां भी भाजपा को लाभ नहीं हुआ। इस चुनाव नतीजे ने कहीं न कहीं भाजपा की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

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