सेना में जाने को हो जाएं तैयार, यहां हो रहीं भर्तियां...

Funeral of lance naik Gurmail Singh in his village

सेना में जाने को हो जाएं तैयार, यहां हो रहीं भर्तियां...
सेना में जाने को हो जाएं तैयार, यहां हो रहीं भर्तियां…

‘कबतक हमारे जवान मरते रहेंगे, पाकिस्तान को करारा जवाब मिलना चाहिए’

धोखे से कायर वार करते हैं, हिम्मत है तो सामने आकर जंग लड़े। ये शब्द एक शहीद जवान की पत्नी के हैं…

राजौरी के केरी सेक्टर में शनिवार दोपहर करीब 12 बजे भारतीय सेना के जवान पेट्रोलिंग कर रहे थे। इसी बीच अचानक पाकिस्तान ने फायरिंग शुरू कर दी। फायरिंग की चपेट में आने से अमृतसर के कुठनंगल थाने के तहत गांव अल्केरा के लांस नायक गुरमेल सिंह (34), तलवंडी साबो (बठिंडा) के गांव कोरेयाना के जवान कुलदीप सिंह, करनाल (हरियाणा) के परगट सिंह (30) और महाराष्ट्र के मेजर महारकर प्रफुल्ल अम्बादास (32) शहीद हो गए।

गुरमेल सिंह 2005 में सेना में भर्ती हुए थे। उनके परिवार में पत्नी कुलजीत कौर और सात साल की बेटी रिपनदीप कौर हैं। गुरमेल की शहादत की खबर उसकी पत्नी कुलजीत कौर को शनिवार रात करीब आठ बजे मिली। गांव के लोग गुरमेल के घर पर जमा हो गए। वहीं रविवार देर शाम गुरमेल सिंह का पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया।

कुलजीत कौर का कहना था कि पति की शहादत देश के लिए है, मेरे पति देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए है। पाकिस्तान को करारा जवाब मिलना चाहिए। उसमें हिम्मत है तो सामने आकर जंग लड़े। धोखे से वार कायर करते हैं। गुरमेल सिंह ने अपने कुल को जीत लिया है।

तेरह साल पहले कुलजीत कौर की शादी गुरमेल सिंह से हुई थी। दोनों की आठ साल की बेटी है। उसे गुरमेल सिंह बिट्टी कहकर बुलाते थे। कुलजीत कौर के पास पीली पगड़ी, पीले कोट में वो आखिरी तस्वीर है, जो बीती 10 दिसंबर को मोबाइल से खींची थी। कुलजीत ने शादी का सेहरा भी संभाल कर रखा है।

उनका कहना है कि यह मेरे जीने का सहारा है। अब उनके पास गुरमेल की यादें ही हैं, जिसे वह सहेज कर आखिरी सांस तक रखेंगी। उन्होंने कहा कि वाहे गुरु जी, मुझे हर जन्म में गुरमेल सिंह ही पति बनाना। उनके चरणों में मेरा हर जन्म गुजरे।

आठ साल की बिट्टी आज खामोश थी। मौत और शहादत से अंजान। उसे केवल यह पता था कि अब उसके पापा कभी उसे मिलने नहीं आएंगे और न ही उसके लिए चॉकलेट लाएंगे। बिट्टी परिवार को रोते देख रोने लगी और कहने लगी कि अब उसे बिट्टी कौन पुकारेगा। उसे शहादत की खबर के बाद से ही कमरे में ले जाया गया। हालांकि रोने की आवाज सुनकर वह रात भर रोती रही।

तिरंगे में लिपट कर आया सपूत, पत्नी के साथ रोया पूरा गांव

अपने बहादुर बेटे के शव देखते ही पूरा गांव एक साथ रो पडा। बच्चे, जवान, बूढे़, महिलाओं की रोने के आवाज से पूरा इलाका गूंजने लगा

जम्मू-कश्मीर के राजोरी सेक्टर में पाक सेना की गोलीबारी में शहीद हुए मेजर और तीन जवानों में से एक लांस नायक गुरमेल सिंह (34) कत्थूनंगल के गांव अल्केरा के रहने वाले थे। गांव के गुरुद्वारा साहिब में जहां श्री गुरु गोबिंद सिंह के 350वें प्रकाश पर्व पर शुकराना हो रहा था, वहीं शहीद का परिवार भी शुकराना कर रहा था कि उनके घर में गुरमेल सिंह जैसे जांबाज ने जन्म लिया, जिसने देश के लिए कुर्बानी दी।

बेटे गुरमेल की पुरानी फोटो देखकर पिता तरसेम सिंह फफक पड़े। वह कहने लगे कि मेरे बेेटे जैसा सुंदर, सुशील और आज्ञाकारी शायद ही कोई हो। बेटा भले ही शहीद हो गया हो, लेकिन पिता का दिल रो ही पड़ता है।

तरसेम सिंह कहने लगे कि मेरा दिल कमजोर नहीं है, देश के लिए बेटे की शहादत पर रब का शुक्रगुजार हूं कि मुझे वाहेगुरु ने ऐसी औलाद दी। मेरा मन रो तो रहा है, लेकिन टूटा नहीं है। मैं मातम नहीं मना सकता, लेकिन आंसू भी रोक नहीं पा रहा हूं।

अब तो सेहरा और तस्वीर ही सहारा

तेरह साल पहले ही कुलजीत कौर की शादी गुरमेल सिंह से हुई थी। आठ साल की बिटिया है, जिसे गुरमेल सिंह बिट्टी कहकर बुलाते थे। कुलजीत कौर के पास पीली पगड़ी, पीले कोट में वो आखिरी तस्वीर है। बीते 10 दिसंबर को मोबाइल से खींची थी। कुलजीत ने शादी का सेहरा भी संभाल कर रखा है, कहती है यह मेरे जीने का आसरा है। अब उसके पास गुरमेल की यादें ही हैं, जिसे वो सहेज कर आखिरी सांस तक रखेगी।

बेटी बोली! अब कौन कहेगा बिट्टी

आठ साल की बिट्टी पूछती थी पापा भारत-पाकिस्तान आखिर क्यों लड़ते हैं। बिट्टी आज खामोश थी। मौत और शहादत से अंजान। उसे केवल यह पता था कि अब उसके पापा कभी उसे मिलनें नहीं आएंगे और न ही उसके लिए चाकलेट लाएंगे। बिट्टी परिवार को रोते देख रोने लगती है, उसे शहादत की खबर के बाद से ही एक कमरे में लिटा दिया गया है, हालांकि रोने की आवाज सुनकर वो रात भर रोती रही।

कुल जीत गया मेरा गुरमेल – कुलजीत

पति की शहादत की खबर कुलजीत कौर को शनिवार करीब रात आठ बजे मिली। खबर मिलते ही फैल गई। गांव के लोग शहीद के घर पर जमा हो गए। कुलजीत कौर कहती है कि पति की शहादत देश के लिए है, मेरा पति देश की रक्षा के लिए शहीद हुआ है। पाकिस्तान को करारा जवाब मिलना चाहिए। उसमें हिम्मत है तो सामने आकर जंग लड़े। धोखे से वार कायर करते हैं। गुरमेल सिंह ने अपने कुल को जीत लिया है। अपने वशंजों को अमर कर दिया है।

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