एलिवेटेड रोड

Green flag to elevated road beside Yamuna river now it become easy to go Faridabad from Delhi

दिल्ली से फरीदाबाद आना-जाना होगा आसान, यमुना किनारे एलिवेटेड रोड को मिली हरी झंडी

दिल्ली से फरीदाबाद जाने-आने वालों के लिए खुशखबरी है। 3580 करोड़ रुपये से बनने वाली हाईवे परियोजना के रास्ते में आने वाली कानूनी बाधाएं दूर होती दिख रही हैं। एनजीटी द्वारा गठित निगरानी समिति ने यमुना किनारे लगभग तीन किलोमीटर लंबी एलिवेटेड रोड के निर्माण को हरी झंडी दे दी है।

बता दें कि मार्च में एनजीटी ने इसके निर्माण को मंजूरी देने से इनकार करते हुए मामले को यमुना निगरानी समिति के समक्ष भेज दिया था। साथ ही यह जांचने का आदेश दिया था कि कहीं इससे नदी और पर्यावरण को कोई नुकसान तो नहीं होगा।

ये जुड़ेंगे

डीएनडी के रिंग रोड जंक्शन से कालिंदी कुंज, फरीदाबाद व बल्लभगढ़ बाइपास होते हुए कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेस-वे (केएमपी) के पास दिल्ली मुम्बई एक्सप्रेस-वे को यह परियोजना जोड़ेगी। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने अरबों की इस परियोजना का शिलान्यास 1 मार्च को किया था।

कुछ शर्तों के साथ मंजूरी

दिल्ली के पूर्व मुख्य सचिव शैलजा चंद्रा और एनजीटी के पूर्व विशेषज्ञ सदस्य बीएस साजवान की निगरानी समिति ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, डीडीए और अन्य संबंधित महकमों का पक्ष सुनने के बाद कुछ शर्तों के साथ एलिवेटेड रोड के निर्माण को मंजूरी दे दी है। हालांकि, समिति ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को तब तक काम शुरू नहीं करने का निर्देश दिया है, जब तक नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) उनके निर्णय को स्वीकार न कर ले या कोई अन्य आदेश न पारित करे। समिति ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि इससे नदी को नुकसान नहीं हो। साथ ही समिति ने कहा कि इससे दिल्ली एनसीआर में यातायात जाम की समस्या से छुटकारा मिलेगा, जिससे पर्यावरण को फायदा होगा।

ट्रिब्यूनल ने समिति को भेजा था मामला

ट्रिब्यूनल अध्यक्ष जस्टिस एके गोयल की अगुवाई वाली पीठ ने एलिवेटेड रोड के निर्माण की अनुमति देने से इनकार करते हुए मामले को यमुना को प्रदूषणमुक्त करने के लिए गठित प्रिंसिपल कमेटी और निगरानी समिति के समक्ष भेज दिया था। ट्रिब्यूनल ने कहा था कि रोड बनाने के राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की इस मांग पर समिति विचार करे। प्राधिकरण ने एनजीटी में अर्जी दाखिल कर यमुना किनारे 2.9 किलोमीटर का एलिवेटेड रोड बनाने की मांग की थी। प्राधिकरण ने समिति के समक्ष भी कहा कि एलिवेटेड रोड के निर्माण से यमुना और इसके खादर को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा, क्योंकि यह निर्माण पीडब्ल्यूडी के मौजूदा रोड/बंध के ऊपर किया जाना है।

यह शर्तें

  • मौजूदा बंध में किसी तरह से छेड़छाड़ नहीं किया जाएगा। इसे और मजबूत करने और डीडीए द्वारा बनाए गए जैव विविधता पार्क जाने वाले लोगों के लिए पर्याप्त संख्या में पार्किंग की व्यवस्था करने का आदेश दिया।
  • एलिवेटेड रोड के निर्माण के लिए यमुना खादर में कैंप कार्यालय और निर्माण का प्लांट नहीं लगेगा।
  • एलिवेटेड रोड के खंभों के चारों ओर प्रिंसिपल कमेटी की सिफारिश के अनुसार हरित क्षेत्र विकसित करना होगा। इसकी देखरेख का जिम्मा भी राष्ट्रीय राज्यमार्ग प्राधिकरण का होगा।
  • निर्माण के दौरान पर्यावरण को कोई नुकसान तो नहीं हो रहा, इसकी जांच अंबेडकर विश्वविद्यालय का ह्यूमन इकोलॉजी विभाग नियमित तौर पर करेगा।
  • निर्माण का मलबा यमुना खादर या किसी भी जलाशय के आसपास नहीं फेंका जाएगा। इसका परिवहन दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति की निगरानी में होगा।
  • निर्माण के दौरान खुदाई से निकलने वाले मलबे और मिट्टी को चिह्नित जगहों पर ही फेंका जाएगा।

इन्हें फायदा

आश्रम, बदरपुर सहित दक्षिणी दिल्ली के कई इलाके, फरीदाबाद और बल्लभगढ़ क्षेत्र।

3580 करोड़ की लागत से 59 किलोमीटर लंबा हाईवे बनना है

रिंग रोड पर डीएनडी जंक्शन से होते हुए कालिंदी कुंज, फरीदाबाद और बल्लभगढ़ बाइपास होते हुए कुंडली-मानेसर-पलबल एक्सप्रेस-वे (केएमीपी) के पास दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेस-वे को जोड़ने के लिए 59 किलोमीटर की यह परियोजना है। इस परियोजना पर 3580 करोड़ रुपये लागत आएगी।

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