Cow

Hunger and thirsty eleven cattle died

उत्तर प्रदेश के योगी राज में भूख-प्यास से तड़प-तड़प कर मर गई 11 गोवंश

योगी सरकार ने गायों की सेवा और उन्हें सुरक्षित रखने के उद्देश्य से गोशालाएं खुलवाई थीं। मगर ये गोशालाएं गोवंश के लिए मौत शाला बन गई हैं। ये ऐसी सरकारी कसाईखाना बन गई हैं, जहां गाय भूख से, प्यास से तड़प-तड़प कर मर रहीं हैं। उनके शरीर में कीड़े पड़ गए हैं। गोशाला में गायों के मरने के बाद या तो उन्हें अंदर या फिर आसपास दफन कर दिया जाता है। जिससे कि किसी को भनक न लगे। ताजा मामला विकास खंड जलालाबाद के ग्राम पंचायत जेवा और ग्राम पंचायत बसीरापुर भाट की संयुक्त गोशाला का है। यहां दस से अधिक गायों की मौत हो गई। पांच गाय मरणासन्न थीं। दो गायों के शरीर में कीड़े पड़ गए थे, जो दर्द से तड़प रहीं थीं।

गोशाला में 47 गायों के रखने की व्यवस्था थी। इसमें प्रशासन की ओर से जेवा के ग्राम प्रधान को 26 और बसीरापुर भाट के ग्राम प्रधान को 24 गायों की जिम्मेदारी दी गई थी। मगर ये गोशाला प्रशासनिक लापरवाही के कारण बूचड़खाने में तब्दील हो गई। भूख-प्यास और तेज धूप से एक-एक कर गाय तिल-तिल कर मरने लगीं। ग्रामीणों का दावा है कि इसकी जानकारी दोनों के गांवों के सचिवों को देने के साथ ही अफसरों को दी गई। मगर किसी ने कोई सुध नहीं ली। नतीजा गायों के मरने का सिलसिला जारी है। प्रधान प्रतिनिधि बोले मेरी 21 गाय सुरक्षित

बसीरापुर भाट के ग्राम प्रधान बालिका देवी के बेटे अखिलेशका दावा है कि उसकी 21 गाय सुरक्षित हैं। बताया कि उसे 24 गाय दी गई थीं। इसमें से तीन मर गई। इसके बाद वो यहां से अपने हिस्से की 21 गाय ले गया और घर में बांध लीं। जो आज भी बंधी हैं। वहीं जेवा के ग्राम प्रधान जितेंद्र का कहना है कि उसकी एक भी गाये नहीं मरीं। जबकि ग्रामीणों का कहना है कि जितेंद्र की ही गायों की मौत हुई है। पुलिस जब गोशाला पहुंची तो जितेंद्र मौके से भाग निकले, बुलाने पर भी वो नहीं आए। बिखरी पड़ी थीं हड्डियां-कंकाल

गोशाला के अंदर और बाहर का नजारा बेहद ही भयावह था। गोवंश के कंकाल और हड्डियां बता रहीं थीं, कैसे गोवंश ने दाम तोड़ा होगा। गोशाला से आ रही दुर्गंध से लोग परेशान थे। कुत्ते और कौवे शवों को नोच रहे थे। ग्रामीणों ने बताया कि मरने के बाद गायों को गोशाला के पीछे बहने वाले नाले और आसपास स्थित झाड़ियों में फेंक दिया जाता था। जब पुलिस और मीडिया कर्मी मौके पर गए तो वहां कंकाल और गोवंश के शव मिले। ग्रामीणों ने दावा किया कि 15 से अधिक गोवंश की मौत हुई है। भनक लगने पर मृत गोवंश को गौशाला में दबा दिया गया। आखिर चारा कहां गया और किसने खाया

सीएम योगी भले ही गोवंश को लेकर चितित हों और बजट जारी कर रहे हों, मगर सरकार के नौकरशाह इसको लेकर कतई गंभीर नजर नहीं आते। इसका नतीजा ये हो रहा है कि गोवंश की भूख-प्यास से मौत हो रही है। अब सवाल ये उठता है कि अगर गोवंश की मौत भूख-प्यास से हो रही है तो सरकार द्वारा आया लाखों रुपया और उस रुपये से आया चारा कहां गया और किसने खाया?

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