अखिलेश बनाम शिवपाल

Loksabha Election 2019 Shivpal Singh Yadav will be in front of nephew Akshay Yadav in Firozabad

फिरोजाबाद में चाचा शिवपाल के खिलाफ मैदान में अक्षय यादव, होगा जोरदार घमासान

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव 2017 से पहले समाजवादी पार्टी के सबसे बड़े परिवार की घमासान बढ़कर लोकसभा चुनाव 2019 तक पहुंच गया है। समाजवादी पार्टी में सम्मान न मिलने से आहत शिवपाल सिंह यादव ने प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का गठन किया। उनकी पार्टी की लोकसभा में 80 सीट पर चुनाव लडऩे का दावा कर रही है। शिवपाल सिंह यादव ने फिरोजाबाद से चुनाव लडऩे का ऐलान भी कर रखा है। ऐसे में अब उनके सामने भतीजा अक्षय यादव समाजवादी पार्टी ने ताल ठोंक रहा है।

समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव को शिवपाल सिंह यादव अपनी पार्टी के चुनाव लड़वाने की योजना बना रहे थे। समाजवादी पार्टी ने आज मुलायम सिंह यादव को मैनपुरी से प्रत्याशी घोषित कर दिया है। सपा के मुख्य महासचिव रामगोपाल यादव के बेटे अक्षय प्रताप यादव फिरोजाबाद से चाचा के खिलाफ शिवपाल यादव के खिलाफ ताल ठोकेंगे।

प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने सपा महासचिव रामगोपाल यादव से सियासी अदावत के चलते ही फिरोजबाद से चुनाव लडऩे का ऐलान किया है। सपा ने इस सीट पर एक बार फिर अपने मौजूदा सासंद अक्षय यादव को चुनाव लड़ाने का ऐलान किया है। अब फिरोजबाद सीट पर चाचा-भतीजे के बीच घमासान होगा।

शिवपाल और रामगोपाल के बीच बीते ढाई साल से तल्खी बढ़ी है। सपा में विभाजन से पहले ही दोनों के बीच सियासी दुश्मनी बढ़ गई थी। इस दौरान रामगोपाल जहां अखिलेश यादव के साथ खड़े थे। वहीं, शिवपाल मुलायम के साथ थे। सपा के विभाजन के बाद शिवपाल-रामगोपाल के बीच की दरार और भी गहरी हो गई। सपा-बसपा गठबंधन बनने के बाद रामगोपाल यादव ने अपने बेटे को फिरोजबाद से उतारा है। जिस तरह से फिरोजबाद में यादव समुदाय के बीच शिवपाल यादव ने अपनी पकड़ बनाई है।

फिरोजाबाद के ही सिरसागंज से विधायक और मुलायम सिंह यादव के समधी हरिओम यादव भी रामगोपाल के खिलाफ बगावत का झंडा उठाए हुए हैं और शिवपाल के साथ खड़े हैं। सपा पूर्व विधायक मोहम्मद अजीम भी शिवपाल के साथ हैं। ऐसे में अब तो फिरोजबाद सीट से अक्षय यादव की राह आसान नहीं है। 2014 के चुनाव में अक्षय यादव भाजपा उम्मीदवार एसपी सिंह बघेल से 1,14,059 वोट से जीत हासिल कर सके थे। इस बार शिवपाल के ताल ठोकने से उनकी राह और भी मुश्किल भरी नजर आ रही है। 2017 के विधानसभा चुनाव में फिरोजबाद की पांच सीटों में से चार सीटें भाजपा के पास हैं और एक सीट जो सपा को मिली थी। वो भी बगावत करके शिवपाल के साथ हैं। शिवपाल ने अपनी पार्टी बनाने के बाद जिस तरह से फिरोजाबाद को टारगेट किया है। उससे रामगोपाल यादव के बेटे की राह कांटों भरी नजर आ रही है।

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