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सपनों की सड़क से लखनऊ और कानपुर
सपनों की सड़क से लखनऊ और कानपुर

सपनों की सड़क से लखनऊ और कानपुर को जोड़ने की तैयारी: मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव 

कुछ-कुछ सुंदर सपना जैसा लगने वाली पिलर्स पर बनी सड़क जल्द कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे के रूप में हकीकत बनती नजर आएंगी। इसकी तैयारी हो रही है।

पिलर्स पर सड़क। नीचे हल्दी, बेला, गुलाब के फूलों के लहलहाते खेत और सड़क के दोनों छोर पर बरसात का पानी संरक्षित करने का इंतजाम…कुछ सुंदर सपना लगने वाली ये बातें जल्द कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे के रूप में हकीकत नजर आएंगी।

प्रदेश सरकार ‘मैनचेस्टर कानपुर और बाबूनगरी लखनऊ’ को ट्विन सिटी शहर के रूप में विकसित करने के ख्वाब को हकीकत में तब्दील करने की मंशा संजोये है, जिसके लिये गंगा बैराज कानपुर से लखनऊ के चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट तक नये एक्सप्रेसवे के निर्माण की कार्य योजना तैयार है। मुख्य सचिव आलोक रंजन की अध्यक्षता में आज इस कार्ययोजना पर चर्चा हुई। जिसमें बताया गया कि नया एक्सप्रेस वे पूर्णत: पिलर्स पर होगा। किसानों से सिर्फ पिलर्स के उपयोग में आने वाली जमीन मांगी जाएगी। बदले में जमीन के मुआवजे के साथ पिलर्स के बीच के स्थान पर कृषि उत्पादन का भंडार बनेगा। बचे स्थान पर हल्दी, गुलाब, बेला और दूसरे फूलों की खेती करायी जायेगी। इसमें किसानों को आर्थिक मदद भी दी जाएगी। कृषि विश्वविद्यालय कानपुर के वैज्ञानिकों ने इस क्षेत्र की जमीन को फूलों की खेती के योग्य बताया है।

70 किलोमीटर लंबे मार्ग में हर दस किमी पर दो पिलर्स के मध्य कृषि विपणन केंद्र भी खोले जाएंगे। सड़क के दोनों ओर बाउंड्री वाल बनाकर वर्षा जल संचयन होगा। यह दूरी सिर्फ 40 मिनट में पूरी हो जाएगी। परियोजना के लाभ गिनाते हुए कहा है कि कानपुर के उद्योगपतियों, नौकरीपेशा लोगों को जहां इससे राहत मिलेगी वहीं एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी से फूलों का निर्यात करने में भी आसानी होगी। हाईवे पिलर्स पर होने के चलते जमीन अधिग्र्रहण की दुश्वारी भी नहीं आयेगी।

क्यों जरूरत इस सड़क की

परियोजना का खाका तैयार करने वालों ने तर्क दिया है कि प्रदेश के मैनचेस्टर कहे जाने वाले कानपुर का औद्योगिक स्वरूप 1980 तक बरकार था लेकिन 90 के दशक में चकेरी एयरपोर्ट में और अधिक विकास नहीं होने से हवाई सेवा लगभग बंद हो गयी। इस कारण उद्योग-धंधों से जुड़ी यात्राएं बाधित होने लगीं। व्यापारियों ने दूसरे शहरों का रुख शुरू कर दिया। इससे कानपुर के औद्योगिक स्वरूप में गिरावट का दौर शुरू हो गया। गंगा बैराज से चरण सिंह एयरपोर्ट तक जाममुक्त सड़क बनने से दोनों शहरों को टिवनसिटी के रूप में विकसित करने के साथ लोगों को हवाई सुविधा मिलने लगेगी, जिससे दोनों शहरों का एक साथ विकास होगा।