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एसपी नेता शिवपाल यादव ने बेटे आदित्य संग की सीएम योगी से मुलाकात
एसपी नेता शिवपाल यादव ने बेटे आदित्य संग की सीएम योगी से मुलाकात

एसपी नेता शिवपाल यादव ने बेटे आदित्य संग की सीएम योगी से मुलाकात

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बुधवार को समाजवादी पार्टी (एसपी) नेता शिवपाल यादव ने मुलाकात की। हालांकि इसे शिष्टाचार भेंट बताया गया, लेकिन एसपी में हाशिए पर चल रहे शिवपाल की योगी से मुलाकात के सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं। शिवपाल और योगी की मुलाकात मुख्यमंत्री के सरकारी आवास 5 कालिदास मार्ग पर करीब 15 मिनट तक चली। इस दारौन दोनों नेताओं के बीच किन मुद्दों पर बात हुई, यह जानकारी अभी तक सामने नहीं आ पाई है। शिवपाल ने भी मुलाकात के बाद मीडिया से बात नहीं की।

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री शिवपाल सिंह यादव मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी से मिलने पहुंचे। उनके साथ उनके बेटे आद‌ित्य यादव भी मौजूद रहे। श‌िवपाल वहां कुछ ही देर रुके फ‌िर अपने अवास के ल‌िए न‌िकल गए। उन्होंने मीड‌िया से बात नहीं की।

बता दें क‌ि योगी के मुख्यमंत्री बनने पर शिवपाल ने ट्व‌िटर पर बधाई दी थी साथ ही उन्होंने ड‌िप्टी सीएम डॉ द‌िनेश शर्मा और केशव मौर्य को भी ट्वीट करके शुभकामना दी थी।

वहीं मंगलवार को उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष हृदयनारायण दीक्षित से उनके आवास पर मुलाकात की। यादव और दीक्षित की मुलाकात करीब आधा घंटा चली थी।

इस दौरान शिवपाल ने दीक्षित को विधानसभा अध्यक्ष चुने जाने पर बधाई दी। दीक्षित ने शिवपाल को अपनी लिखी कई पुस्तकें भी भेंट की।

दोनों के बीच कई मुद्दों पर अनौपचारिक बातचीत हुई। इनमें सदन की सार्थकता और सरोकार तथा इसके जरिये जन समस्याओं के समाधान पर चर्चा हुई।

हालांकि दोनों नेताओं ने इसे शिष्टाचार मुलाकात बताया। उल्लेखनीय है कि दोनों के बीच पहले से ही मधुर रिश्ते रहे हैं।

यूपी के विधानसभा चुनाव में सपा की करारी हार से मुलायम इतने दुखी नहीं थे, जितने उसके बाद बने हालात पर दिखाई दिए।

मुलायम ने चुनाव के दौरान केवल कांग्रेस से गठबंधन का विरोध किया था। रिजल्ट आने के बाद जहां शिवपाल ने इसे अहंकार की हार बताया, वहीं मुलायम ने कहा कि हार के लिए कोई एक व्यक्ति जिम्मेदार नहीं होता। सपा के कुछ नेताओं के मुताबिक मुलायम को भरोसा था कि हार से अखिलेश सबक लेंगे।

मुलायम पार्टी में एका की कोशिशों में जुटे थे। उन्हें उम्मीद थी कि उन्हें फिर से राष्ट्रीय अध्यक्ष पद सौंपकर सम्मान लौटाया जाएगा, लेकिन चुनाव के बाद राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक और विधानसभा व विधान परिषद में नेता विरोधी दल के चयन समेत किसी भी फैसले में मुलायम की राय नहीं ली गई। जिस पार्टी को उन्होंने बनाया, खड़ा किया, सत्ता दिलाई,

उसी में इस कदर उपेक्षा से आहत होकर मैनपुरी में उनका दर्द छलक पड़ा। उन्होंने अगली लड़ाई मैनपुरी से लड़ने का एलान कर भविष्य की सियासत का संकेत दे दिया है। सपा के कुछ नेताओं का मानना है कि मुलायम नई पार्टी का गठन भी कर सकते हैं।