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करवा चौथ
करवा चौथ

करवाचौथ पर महिलाओं को पूजा के लिए मिलेगा सिर्फ 1.16 मिनट का समय, ये है शुभ मुहूर्त

करवा चौथ पर इस बार महिलाओं को पूजा के लिए सिर्फ 1 घंटा 16 मिनट का समय ही मिलेगा। आगे जानिए क्या है पूजा का शुभ मुहूर्त..

देशभर में त्‍यौहारों का सीजन है. नवरात्र और दशहरा खत्‍म हो जा चुका है. अब करवा चौथ और दिवाली की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. बाजारों में चुड़ी और मेहंदी वालों की चांदी हो चुकी है. दरअसल करवा चौथ के लिए बाजारों भीड़ से भरे पड़े हैं. कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को करवा चौथ का व्रत किया जाता है. यह पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद अहम माना जाता है. इस दिन विवाहित महिलाएं और जिन महिलाओं की शादी होने वाली है वह अपने पति की लम्बी आयु और खुशहाल दांपत्य जीवन के लिए निर्जला यानी बिना अन्न और जल का व्रत रखती हैं. आपको बात दें कि इस व्रत को कई स्‍थानों पर करक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है.

करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि में रखा जाता है। पति की लंबी आयु के लिए रखा जाने वाला यह व्रत चंद्रोदय व्यापिनी तिथि में करना चाहिए। इस बार करवा चौथ का व्रत आठ अक्तूबर को रखा जाएगा। चतुर्थी तिथि का प्रारंभ आठ अक्तूबर को शाम 4.58 मिनट पर होगा।

इस तिथि का समापन नौ अक्तूबर को मध्याह्न 2.16 मिनट पर होगा। इस बार चंद्रोदय 8 अक्तूबर को रात्रि 8.10 मिनट पर हो रहा है। आचार्य संतोष खंडूरी के अनुसार करवा चौथ पर पूजा का मुहूर्त शाम 5.54 मिनट से शाम 7.10 मिनट तक शुभ रहेगा।

करवा चौथ के दिन शाम को स्त्रियां चन्द्रमा को जल अर्पण करती हैं और फिर चांद और पति को छलनी से देखती हैं. इसके बाद वे अपने पति के हाथ से पानी पीकर अपना व्रत पूरा करती हैं. करवा चौथ के व्रत में शिव, पार्वती, कार्तिकेय, गणेश तथा चंद्रमा का पूजन करने का विधान है. चंद्रमा आने के बाद महिलाएं उसके दर्शन करती है, चंद्रमा को जल चढ़ाकर भोजन ग्रहण करती हैं.

इस अवधि में शुभ की चौघड़िया एवं सूर्य की होरा रहेगी। रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देकर इस व्रत का समापन किया जाता है। चतुर्थी के देवता भगवान गणेश हैं। इस व्रत में गणेश जी के अलावा शिव-पार्वती, कार्तिकेय और चंद्रमा की भी पूजा की जाती है।

इस दिन गेहूं अथवा चावल के 13 दानें हाथ में लेकर कथा सुननी चाहिए। मिट्टी के करवे में गेहूं, ढक्कन में चीनी एवं उसके ऊपर वस्त्र आदि रखकर सास, जेठानी को देना चाहिए। रात में चंद्रमा उदय होने पर छलनी की ओट में चंद्रमा का दर्शन करके अर्घ्य देने के पश्चात व्रत खोलना शुभप्रद रहता है। शास्त्रों के अनुसार महाभारत काल में द्रोपदी ने अर्जुन के लिए यह व्रत किया था।

वहीं व्रत रखने वाली स्त्री को काले और सफेद कपड़े पहनने से बचना चाहिए। इस दिन लाल और पीले रंग के कपड़े पहनना विशेष फलदायी होता है। इस दिन महिलाओं को चाहिए कि वे पूर्ण श्रृंगार करें और अच्छा भोजन खाएं। इस दिन पति की लंबी उम्र के साथ संतान सुख भी मिल सकता है।

करवा चौथ 2017: क्‍यों जरूरी है चांद देखना

करवा चौथ के दिन चंद्रमा का उदय शाम आठ बजकर चौदह मिनट पर होगा. इस दिन महिलाएं चंद्रमा को देखे बिना न तो कुछ खाती हैं और न ही पानी ग्रहण करती हैं. चंद्रमा का उदय होने के बाद सबसे पहले महिलाएं छलनी में से चंद्रमा को देखती हैं फिर अपने पति को. इसके बाद पति अपनी पत्नियों को लोटे में से जल पिलाकर उनका व्रत पूरा करवाते हैं. कहते हैं कि चांद देखे बिना यह व्रत अधूरा रहता है.