फरीदाबाद

HARERA creates sealed account of builder 484 buyers will get home in Haryana

हरियाणा में बिल्डर की संपत्ति बेच 484 फ्लैट का काम पूरा होगा

पिछले तीन साल से घर के लिए चक्कर लगा रहे अर्थ कोपिया के करीब 484 खरीददारों को जल्द घर मिलेगा। हरेरा गुरुग्राम ने कड़ा कदम उठाते हुए सेक्टर-112 में अधूरे पड़े अर्थकोपिया सोसाइटी प्रोजेक्ट में देरी पर अर्थ इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और ओरोकेम बिल्डप्रॉप प्राइवेट लिमिटेड के खाते सीज किए हैं। हरेरा ने बिल्डर की संपत्ति बेचकर अपनी देखरेख में फ्लैट को तैयार कर खरीदारों को देने का निर्णय लिया है।

हरेरा गुरुग्राम के चेयरमैन डॉ. के के खंडेलवाल की अध्यक्षता में लगी तीन सदस्यीय बेंच ने यह फैसला खरीदारों की शिकायत पर लिया है। डॉ. खंडेलवाल के अनुसार इस प्रोजेक्ट के खरीदारों ने शिकायत दर्ज कराई थी और निर्माण में कोई प्रगति नहीं होने की बात कही थी। मई में मिली इस शिकायत पर हरेरा ने छह सितंबर को आखिरी सुनवाई की थी। हरेरा गुरुग्राम ने शिकायत को सही पाया है। इसके बाद हरेरा ने कड़े फैसले लेते हुए दोनों बिल्डरों के अकाउंट सीज कर दिए और खुद की निगरानी में बाकी निर्माण पूरा करने के लिए हरेरा गुरुग्राम द्वारा प्रोजेक्ट प्रशासक सह जांच आयुक्त की नियुक्ति की गई है।

बाकी के फ्लैट बेचे जाएंगे

इसके बाद हरेरा ने फैसला लिया है इस प्रोजेक्ट के बाकी फ्लैट को बेचने के साथ-साथ खरीदारों से बाकी पैसा लेकर इसे पूरा किया कराया जाएगा। इसके लिए हरेरा ने एक अधिकारी नियुक्त किया है जो खरीदादारों की एसोसिएशन इस प्रोजेक्ट को देखेगा।

2011 में शुरू किया था प्रोजेक्ट

गुरुग्राम के सेक्टर-112 में अर्थ इंफ्रास्ट्रक्चर द्वारा अर्थकोपिया सोसाइटी नाम से प्रोजेक्ट वर्ष 2011 में शुरू किया गया था। 31 सितंबर 2015 में इसे पूरा करके देने का वादा किया था। इसमें 534 में से 484 फ्लैट आवंटित किए जा चुके हैं। इसके लिए 297 करोड़ रुपये बिल्डर द्वारा वसूला गया था। बिल्डर ने प्रोजेक्टर निर्माण पर भी केवल 84 करोड़ रुपये ही खर्च किए, लेकिन अर्थकोपिया के अलॉटियों को तय समय के बाद भी प्रोजेक्ट नहीं मिल सका।

चेयरमैन डॉ. के के खंडेलवाल का कहना है कि इस प्रोजेक्ट का निर्माण जल्द से जल्द कर अलॉटियों को राहत दी जाएगी। अलॉटियों को भी कुछ लाभांश दिया जाएगा। अलॉटियों के हितों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है।

ऐसे पूरा होगा प्रोजेक्ट:

प्रोजेक्ट के बचे हुए 50 फ्लैट की बिक्री की जाएगी। इतना ही नहीं 484 खरीदारों से बची हुई रकम ली जाएगी। इसके साथ सीज किए गए खातों में पड़ी रकम जुटाई जाएगी। इस राशि का इस्तेमाल प्रोजेक्ट को पूरा कराने में किया जाएगा। इसके लिए एक एस्क्रो अकाउंट खुलवाया जाएगा, ताकि काम शुरू हो लोगों को घर मिले। बची हुई राशि से सरकार के देय भुगतान और लोगों को पजेशन में हुई देरी को कंपन्शेट किया जाएगा। प्रोजेक्ट में कई टॉवर हैं कुछ काम काम कम कुछ का ज्यादा बाकी है। हरेरा के रिपोर्ट में 50 फीसदी का हुआ है। प्रोजेक्ट के पूरा होने में करीब 90 करोड़ रुपये और खर्च होंगे।

क्या बोले खरीदार?

हरेरा में शिकायत की थी, अभी फैसले की जानकारी नहीं है। मैं चाहूंगा कि हरेरा बिल्डर से ज्यादा से ज्यादा वसूल करे और खरीदारों पर बोझ कम डाले।

सिद्वार्थ कोपिया, खरीदार

अगर ये फैसला लिया है, तो स्वागत योग्य है। हम खरीदारों को राहत मिलेगी। इंतजार के बाद ही सही कम से अपनी छत तो मिल सकेगी। हरेरा ने शिकायत पर सुनवाई की और कार्रवाई इसके लिए प्राधिकरण की तारीफ करता हूं।

नवीन मलिक, खरीदार

बिल्डर की सौ एकड़ जमीन जब्त होगी

ग्रीनो पोलिस प्रोजेक्ट को पूरा कराने के लिए हरेरा गुरुग्राम ओरिस और थ्री सी बिल्डर की सौ एकड़ जमीन को सीज करेगा। यह फैसला हरेरा बोर्ड ने मंगलवार को लिया।

ऐसा होने पर बिल्डर इस जमीन की न तो बिक्री कर सकेगा और न ही कोई यहां निर्माण कार्य शुरू कर सकेगा। हरेरा ने पहले ही सेक्टर-89 में अधूरे पड़े ग्रीनोपोलिस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए खुद निगरानी करने का फैसला किया था। यह जानकारी हरेरा गुरुग्राम के चेयरमैन डॉ. केके खंडेलवाल ने दी। उन्होंने बताया कि गुरुग्राम के सेक्टर-89 में ग्रीनोपोलिस नामक प्रोजेक्ट में 1862 लोगों को फ्लैट आवंटित किए गए हैं और ये अलॉटी फ्लैट की 80 प्रतिशत से ज्यादा कीमत अदा कर चुके हैं। फलैटों का निर्माण कार्य अभी तक महज 40 से 50 प्रतिशत ही हुआ है। इस प्रोजेक्ट के लिए ओरिस इंफ्रास्ट्रक्चर द्वारा 2011 में लाइसेंस लिया गया था। अलाटियों को इस प्रोजेक्ट में दिसंबर-2015 में पजेशन दिया जाना था, लेकिन अब तक यह संभव नहीं हो पाया है। उल्लेखनीय है कि ओरिस इंफ्रास्ट्रक्चर ने लाइसेंस प्राप्त करने के उपरांत थ्री सी शेल्टर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रा.लि. के साथ समझौता करके निर्माण की जिम्मेदारी उसे सौंप दी। आरोप है कि ओरिस इंफ्रास्ट्रक्चर ने फ्लैटों की बुकिंग से 300 करोड़ तथा थ्री सी इंफ्रास्ट्रक्चर ने 800 करोड़ रुपये की राशि इक्कट्ठा कर ली, परंतु पैसा प्रोजेक्ट में नहीं लगाया।

पहले ही सीज हो चुके हैं बैंक खाते

डॉ. खंडेलवाल के मुताबिक अलाटियों की समस्या को देखते हुए ओरिस इंफ्रास्ट्रक्चर तथा थ्री सी शेल्टर इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटिड के सभी बैंक खाते पहले ही सीज कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि अब हरेरा की देख-रेख में इस प्रोजेक्ट को पूरा करवाया जाएगा। हरेरा एक्ट की धारा-35 के अंतर्गत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए हरेरा ने प्रोफेसर एमएस तुरान को इस प्रोजेक्ट का कमिश्नर इंवेस्टिगेशन नियुक्त किया है। वह जांच करके 10 दिन में सही तथ्य हरेरा के समक्ष रखेंगे।

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