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पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव
पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव

क़ैसर से जूझ रहे अपने पिता के इलाज के लिए अखिलेश यादव की मदद 

आगरा, माँ के पेट से कोई भी न तो समाजवादी पैदा होता है, न हिंदुवादी पैदा होता है, न अंबेडकरवादी पैदा होता है, समाज का व्यवहार ही उसे किसी न किसी दर्शन का प्रेमी बना देता है। फिर चाहे जितनी परेशानिया आए, वह उस दर्शन को छोड़ने को तैयार नहीं होता है। फिर चाहे उसका कितना विरोध हो, चाहे कितने ही रोड़े उसके रास्ते मे अटकाए जाएँ, वह उसी दर्शन के प्रचार – प्रसार मे अपनी ज़िंदगी बिता देना चाहता है।

पिछले दिनों इसी तरह की एक महिला आगरा की जुही प्रकाश से मुलाक़ात हो गई। जिसके हिस्से में दर्द ही दर्द लिखा है। उसके माताजी उसे डाक्टर बनाना चाहती थी, लेकिन माँ को क़ैसर हो गया, उनकी बीमारी में घर का सारा पैसा खर्च हो गया। और अंत मे क़ैसर ने जुही प्रकाश से उसकी माँ छीन लिया। डाक्टर बनने की उसकी रही – सही आशा भी समाप्त हो गई। माँ की याद मे आँसू बहाती जूही प्रकाश की आँखों की नमी भी अभी नहीं सूखी, तब तक डाक्टरों ने उसके पिता मे भी क़ैसर के लक्षण हैं, इस बात की घोषणा कर दी।

जैसे ही इसकी जानकारी जूही प्रकाश को मिली, उसके पैरो के नीचे की जमीन खिसक गई। उसके जिन आँखों की नमी भी अभी नहीं सूखी थी, उन आँखों से आँसू जब – तब खुद ही बहने लगे। घर मे पैसे नहीं, सांत्वना देने वाली माँ नहीं, नाते-रिशतेदारों – जान-पहचान वालों से माँ की ही बीमारी मदद ली जा चुकी थी। ऐसे मे अपनी बेबसी का रोना रोने के सिवा उसके पास कोई चारा नहीं था।

मीडिया वालों को भी उसके दुख की जानकारी हुई, उसने जूही प्रकाश की बेबसी की कहानी छापी । यह कहानी किसी तरह तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की नजरों के सामने आई। या किसी ने उन्हे बताया। वे द्रवित हुए और तुरंत जूही प्रकाश के पिता के इलाज के लिए 6 लाख की मदद दे दी । जूही प्रकाश को जैसे ही इस मदद के संबंध मे पता चला कि अखिलेश भैया ने उसके पिता के इलाज के लिए दिया है। वे तो उसके लिए फरिश्ता हो गए। उसने उन पैसों से ही अपने पिता का इलाज किया । जो अब ठीक हैं।

इसी मदद ने इस दलित लड़की जूही प्रकाश की पूरी सोच बदल दी। उसने संकल्प कर लिया कि अब वह उस फरिश्ते, जिसने उसके पिता के इलाज के लिए मदद की है । आजीवन काम करती रहेगी। उसी क्षण से जुही प्रकाश समाजवादी हो गई। जब उसने अखिलेश के निर्देशों के परिपालन के लिए समाजवादी कार्यों मे हाथ बटाना शुरू किया तो कुछ लोगों ने उसका विरोध करना शुरू कर दिया । उसे उल्टा – सुल्टा कहना शुरू कर दिया ।

यूपी लाइव के संपादक से बातचीत करते हुए उसने कहा कि ये लोग उसका विरोध करें, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। लेकिन इन लोगों ने मेरे चरित्र पर लांछन लगाना शुरू कर दिया । खैर मैं जिद्दी लड़की हूँ। मैं इन लोगों के इन घिनौने आरोपों की परवाह नहीं करती । उसने कहा कि मैं मैंने एमएससी, एमबीए जैसी उच्च शिक्षा ग्रहण की है। मैं यह जानती हूँ, कि मेरे लिए अच्छा क्या है ? बुरा क्या है ? मेरे पिता तो मुझे आईपीएस बनाना चाहते थे, लेकिन उनकी बीमारी ने हम सबको तोड़ कर रख दिया । वे सपने जो माँ ने देखे थे, जो पिता ने देखे, वह मैं पूरा न कर सकी। जब एमएससी और एमबीए की पढ़ाई की, तो नौकरी करना चाहती थी, लेकिन अब उसकी भी इच्छा नहीं होती। अब तो यही लगता है कि अखिलेश जैसे फरिश्ते के आदेशों का पालन और मानवता की सेवा करते-करते यह जीवन कट जाए ।